Vipin Kumar jha ( Story, Shayari & Poems ) 7532871208

अक्षरों का कारीगर हूँ, शब्दों को जोड़-जोड़ कर वाक्य बनाता हूँ !

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Wednesday, September 2, 2020

ग्लोबलाइज्ड गाम { globalized village }



गाम भ' गेल अछि ग्लोबलाइज्ड

फूसक घर बदलि गेल पक्काक मकान मे

तहिना माटिक चूल्हि सँ गैस 

आ डिबिया सँ बल्ब मे

दलान सभ पर नहि छै एक्को टा मेह

टेक्नोलॉजी'क बढैत समय मे 

खेत जोतबाक लेल बरदक जगह टैक्टर

आर मेहक जगह थ्रेशर ल' लेलक

आब अल्फा,बीटा पढायल जाएत अइ प्रॉजेक्टर पर

तासक चौकड़ी लगैत अछि मोबाइल मे

उपनयन मे रसन-चौकीक जगह डीजे बजैत अछि

आ सकरौरीक बदला बटाइत अछि रायता

माहटर साहेब आब ऑनलाइन क्लास लैत छैथ

चौक परहक पीपर'क गाछ बनि गेल अछि विज्ञापनक स्रोत

उपैट गेल गामक हाट आ कोलाहल होइत मेला

किएकी अपना लेने छैथ सभ न्युटन'क तेसर नियम केँ

सगर गाम मे लागि चुकल लाइट

विकास'क साइबर कैफे कहैत अछि 

जे गाम भ रहल अइ डिजिटलाइज्ड

गाम'क सीमान पर ठाढ भ'

रस्ता केँ देखि मुस्किया रहल छी हम

सोचि रहल छी -

जेह रस्ता शहर के तरफ जाएत अछि

वेह गामो के तरफ तँ आबैत अछि 

                        ✍️विपिन कुमार झा 

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